प्रेम की उत्पत्ति कब हुई इसकी पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं है, परंतु आज यह अपने कई दौर से होता हुआ बिल्कुल अलग ढंग से व्यक्त किया जा रहा है।
आपको मालूम हो कि तरीका चाहे जैसा रहा हो पर किसी विशेष रिश्ते के लिए इसकी तासीर हमेशा एक जैसी रही है ।
कई सार्वभौमिक प्राकृतिक उत्पत्तिओं में से यह भी एक सार्वभौमिक तत्व है जो ढाई अक्षर की अपूर्णता लिए हुए पूर्णता को व्यक्त करता है। अगर गणितीय रूप में इसे व्यक्त किया जाए तो इसे परिमेय संख्या के अंतर्गत रखना अधिक उचित होगा। प्रेम को व्यक्त करने के लिए किसी विशेष पैमाने की जरूरत नहीं होती यह जब जिसके लिए होता है स्वयं उसके लिए व्यक्त हो जाता है। प्रेम के कई रूप हैं उन्हीं रूपों में से हम नायक नायिका के प्रेम की चर्चा करेंगे आज के वर्तमान युग में संचार क्रांति से शायद ही कोई अछूता हो और इस क्रांति के कारण प्रेम को व्यक्त करने के तरीके भी बदले हैं, परंतु मोबाइल जब नहीं था तब लोग अपनी प्रेमा अभिव्यक्ति प्रेम पत्र से किया करते थे।
बात 21 वी शताब्दी के शुरुआती दिनो की है।
नायक नायिका का प्रेम परवान चढता है ,नायक शादी सुदा है दोनों लोक लाज के चलते एक दूसरे से मिल नहीं पाते, कभी सामने आने पर नैनों से ही आपसी अभिव्यक्ति होती है और वे एक दूसरे से एकांतमय, क्षण मात्र के लिए ही हो पाते हैं , यह सब चल ही रहा था कि इसी बीच नायिका के विवाह के लिए घर वाले कही रिश्ता देख आते हैं और शादी की तैयारी शुरू हो जाती है।
आप कहती हैं कि हमारा आपका रिश्ता क्या है?



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