प्रथम अकं से अगे ----
प्रसाद घर आता है और देव को फोन लगाता है,दोनों की आपसी बातचीत होती है और उससे उस मोबाइल नंबर की जानकारी मांगता है जिस पर उसने बहुत सारे एसएमएस कर दिए थे।
देव उस नंबर के बारे में अंशतः जानकारी देते हुए कहता है-वह नंबर मेरे घर का है।इस पर प्रसाद बड़ी ही शर्मिंदगी और क्षमा भाव से अपनी उस गलती के लिए माफी मांगता है।
प्रसाद को बेहद दुख इस बात के लिए होता है कि शायद वह लड़की देव की बहन थी, जिसको उसने इतना परेशान किया और बात-बात में वह देव से कह बैठता है कि वह तुम्हारी सिस्टर है क्या?
पर देव इस प्रश्न का उत्तर संतोषजनक नहीं दे पाता है और मुस्करा कर रह जाता है,और कहता है उसी से पूछ लो,देव की इस बात से प्रसाद को बहुत आश्चर्य होता है और सोचता है कि,यह कैसा अनुचित मजाक कर रहा है।
क्योंकि प्रसाद अब तक की बात से यही समझ रहा था कि सिन्नी (Sinni)उसकी बहन है, और मित्र के परिवार के साथ अपने द्वारा किए गए अनुचित व्यवहार को वह स्वयं नहीं सह पा रहा था, और शर्म के मारे गडा जा रहा था।
इसका कारण यह था कि प्रसाद बहुत ही साफ दिल का इंसान था और मित्र व मित्र मंडली को अपनी तरफ से दागदार नहीं करना चाहता था,
पर प्रसाद के मन में यह चल रहा था कि ऐसी गलती हुई कैसे?
वह सोच रहा था कि शायद सिन्नी(Sinni),देव का मोबाइल लेकर उसमें से मेरा नंबर निकाला और डायल किया, पर किस लिए बातें करने के लिए आखिर कैसी बातें करने के लिए?
प्रसाद अभी इसी पशोपेश में था कि देव बोल उठा क्या सोच रहे हो ?
प्रसाद ने कहा आखिर यह सब हुआ कैसे?
देव फिर कहता है उसी से पूछ लो-- फिर यही कहते हुए देव ने सिन्नी को मोबाइल दे दिया,और फिर सिन्नी मुस्कुराते हुए बोली हेलो... प्रसाद उसकी मुस्कान और बोली की मिठास में ही गुम हो गया फिर खुद को संभालते हुए बोला आप कौन?
प्रसाद शरमा गया और फिर बोला मेरे कहने का मतलब आपका और देव का क्या रिश्ता है?
इस पर दोनों की एक साथ आवाज आयी,खुद समझो?
इस पर सिन्नी भी मुस्कुरा कर कहीं अभी नहीं।
सिन्नी मुस्कुराते हुए--आखिर वह सीमित चीज वस्तु या व्यक्ति कौन है जो आपको मिली नहीं?
उसकी इस अठखेलियों से लालायित होकर उसके इर्द-गिर्द लड़कों का जाल बिछा रहता था, और सभी उसे प्रसाद की तरह ही पाना चाहते थे पर पाना जरूर चाहते थे।
इस पर सिन्नी तपाक से बोल उठती है कि,
प्रसाद-- नहीं ऐसा नहीं कि उसके रहने पर ही आप बात करो, बस यूं ही पूछ रहा था।
प्रसाद मुस्कुराते हुए-- ऐसा नहीं है।
समय अपनी गति से चल ही रहा था कि, देव 1 दिन सिन्नी के मोबाइल को देख कर चिढ़ गया और उससे प्रसाद के द्वारा भेजे गए sms के बारे में जानना चाहा।
परंतु इस बात का सिन्नी, देव को शायद संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकी जिसके कारण वह सवालों के घेरे में आ गई।
इस बात को सिन्नी, प्रसाद को नहीं बताती है और वह पहले की तरह ही प्रसाद से जुड़ी रही।
जिसका परिणाम यह होता है कि देव,सिन्नी का आपसी रिश्ता तू -तू मैं-मैं पर जा पहुंचता है।
इधर प्रसाद को इस बात की भनक तक भी नहीं लगती और जब वह इस बात को जानता है तब तक दरिया में पानी काफी बह चुका था।
होता यह है कि देव, सिन्नी से इस बात को लेकर झगड़ा करता है और उसी के सामने अपने मित्र, प्रसाद को भी काफी बुरा भला कहता है जिस पर सिन्नी भड़क जाती है, और प्रसाद का बचाव करते हुए कहती है कि उसकी कोई गलती नहीं है मैं ही उसे sms करती हूं तो वह भी हमें भेज देता है, और सिन्नी माफी मांगती है कि आगे से ऐसा नहीं होगा।
क्या बात है, क्यों इतने नाराज हो?
अब खुशहाल सिन्नी बहुत ही बुझी-बुझी सी रहने लगी थी।
इधर देव, प्रसाद की भी आपसी बातचीत बंद हो गई थी रही बात sms कि तो प्रसाद तो कभी-कभी कर भी देता था पर, देव शायद रुचि नहीं लेता था इसीलिए वह उसका कभी जवाब नहीं दिया इसीलिए प्रसाद भी अब उससे दूर दूर ही रहने लगा था।
इस पर सिन्नी बोलती है, क्या हुआ?
सिन्नी-- फिर इतने गुमसुम क्यों हो गए?
सिन्नी-- हमसे दोस्ती करोगे?
प्रसाद--- दोस्ती तो है, वह करने की क्या जरूरत।
प्रसाद-- अगर दोस्ती ना होती तो तुम हमसे इतनी सारी बातें क्यों करती?
सिन्नी इस बात पर हँस देती है।
प्रसाद घर आता है और देव को फोन लगाता है,दोनों की आपसी बातचीत होती है और उससे उस मोबाइल नंबर की जानकारी मांगता है जिस पर उसने बहुत सारे एसएमएस कर दिए थे।
देव उस नंबर के बारे में अंशतः जानकारी देते हुए कहता है-वह नंबर मेरे घर का है।इस पर प्रसाद बड़ी ही शर्मिंदगी और क्षमा भाव से अपनी उस गलती के लिए माफी मांगता है।
प्रसाद को बेहद दुख इस बात के लिए होता है कि शायद वह लड़की देव की बहन थी, जिसको उसने इतना परेशान किया और बात-बात में वह देव से कह बैठता है कि वह तुम्हारी सिस्टर है क्या?
पर देव इस प्रश्न का उत्तर संतोषजनक नहीं दे पाता है और मुस्करा कर रह जाता है,और कहता है उसी से पूछ लो,देव की इस बात से प्रसाद को बहुत आश्चर्य होता है और सोचता है कि,यह कैसा अनुचित मजाक कर रहा है।
क्योंकि प्रसाद अब तक की बात से यही समझ रहा था कि सिन्नी (Sinni)उसकी बहन है, और मित्र के परिवार के साथ अपने द्वारा किए गए अनुचित व्यवहार को वह स्वयं नहीं सह पा रहा था, और शर्म के मारे गडा जा रहा था।
इसका कारण यह था कि प्रसाद बहुत ही साफ दिल का इंसान था और मित्र व मित्र मंडली को अपनी तरफ से दागदार नहीं करना चाहता था,
पर प्रसाद के मन में यह चल रहा था कि ऐसी गलती हुई कैसे?
वह सोच रहा था कि शायद सिन्नी(Sinni),देव का मोबाइल लेकर उसमें से मेरा नंबर निकाला और डायल किया, पर किस लिए बातें करने के लिए आखिर कैसी बातें करने के लिए?
प्रसाद अभी इसी पशोपेश में था कि देव बोल उठा क्या सोच रहे हो ?
प्रसाद ने कहा आखिर यह सब हुआ कैसे?
देव फिर कहता है उसी से पूछ लो-- फिर यही कहते हुए देव ने सिन्नी को मोबाइल दे दिया,और फिर सिन्नी मुस्कुराते हुए बोली हेलो... प्रसाद उसकी मुस्कान और बोली की मिठास में ही गुम हो गया फिर खुद को संभालते हुए बोला आप कौन?
सिन्नी बोली, वही जिसको आप प्यार भरे sms कर रहे थे।
प्रसाद शरमा गया और फिर बोला मेरे कहने का मतलब आपका और देव का क्या रिश्ता है?
फिर सिन्नी मुस्कुरा कर बोली, देव से ही पूछ लो।
अब प्रसाद भी हंसने लगा था और कहा आखिर तुम लोग अपने रिश्ते के बारे में बता क्यों नहीं रहे हो?
इस पर दोनों की एक साथ आवाज आयी,खुद समझो?
प्रसाद अब समझ गया था कि ए दोनों हीर-रांझे की भूमिका में है।
इस लिये अब उनके साथ प्रसाद भी बातों का लुफ्त उठाने लगा था और मजाक में कहा देव भाई है, तो क्या आप को भाभी कहूं?
इस पर सिन्नी भी मुस्कुरा कर कहीं अभी नहीं।
प्रसाद आखिर फिर कब?
सिन्नी-- जब वह समय आएगा तो आपको पता चल जाएगा।
देव मुस्कुराते हुए--- दूसरे की लवर पर ही डोरे डालोगें कि अपनी भी खोजोगें?
प्रसाद मुस्कुराते हुए--- हम तो अपनों की ही अपनी मान चुके हैं।
देव--बातें ना बनाओ कुछ अच्छा सोचो।
प्रसाद--जो अच्छा सोचते वह तुमने सोच लिया तो अब बचा ही क्या?
देव--अच्छे की कोई सीमा है क्या जो खत्म हो जाएगी?
प्रसाद---सीमा तो नहीं है पर सीमित है।
देव---आखिर जिसकी सीमा नहीं है वह सीमित कैसे हो सकती है?
प्रसाद--यदि आपको कोई चीज वस्तु या व्यक्ति पसंद आ जाए और वह ना मिले तो समझो सीमित ही है।
सिन्नी मुस्कुराते हुए--आखिर वह सीमित चीज वस्तु या व्यक्ति कौन है जो आपको मिली नहीं?
ऐसी ही मस्तियां चल ही रही थी कि प्रसाद फिर से पूछ बैठा कि आखिर तुमको हमारा मोबाइल नंबर मिला कैसे?
(फिर से वो एसएमएस की पूरी कहानी पापा का मोबाइल नंबर देव की सिम आदि के बारे में बताती है जिसका प्रथम अंक में विस्तृत वर्णन है)आप वहां जाकर पढ़ सकते हैं।
अब देव,प्रसाद,सिन्नी तीनों एक दूसरे से परिचित हो गए थे,
अतः आए दिन प्रसाद की बात सिन्नी से भी हो जाया करती थी।
आप को बता देना चाहता हूँ कि, प्रसाद रसिक स्वभाव का होते हुए भी अपने दिल की सर जमी को प्यार की बूंदों से अभिसिंचित नहीं कर सका था,
जब कि सिन्नी प्यार की घटाओं तले अठखेलियां कर रही थी,
उसकी इस अठखेलियों से लालायित होकर उसके इर्द-गिर्द लड़कों का जाल बिछा रहता था, और सभी उसे प्रसाद की तरह ही पाना चाहते थे पर पाना जरूर चाहते थे।
इधर सिन्नी थी की देव के चरणों की धूल बनकर उड़ने को तैयार थी,उड़ने को तैयार थी या यूं कहा जाए कि उसके चरणों में चिपकना भी शुरू कर दिया था तो अतिशियोति नहीं होगी ।
समय अपनी चाल से चल ही रहा था कि 1 दिन सिन्नी ने खुद ही अपने मोबाइल से प्रसाद को फोन करती है,दोनों की आपसी बातचीत होती है परंतु इस वार्तालाप के दौरान प्रसाद ने कई बार देव का जिक्र किया,और सिन्नी से पूछता है कि, देव कहां है?
इस पर सिन्नी तपाक से बोल उठती है कि,
क्या देव के रहने पर ही आप से बातें कर सकती हूं?
प्रसाद-- नहीं ऐसा नहीं कि उसके रहने पर ही आप बात करो, बस यूं ही पूछ रहा था।
सिन्नी-- आपके यूं ही का क्या मतलब?
प्रसाद-- मेरे यूं ही का मतलब कहां गया है इस समय क्या कर रहा है तुम दोनों में सब ठीक तो है।
सिन्नी--बड़ा ख्याल रखते हो उसका?
प्रसाद मुस्कुराते हुए-- ऐसा नहीं है।
ख्याल तो मैं आपका भी रखता हूं आपने कभी महसूस ही नहीं किया।
सिन्नी--मुस्कुराते हुए बड़े आए ख्याल रखने वाले एक भी एसएमएस और फोन कॉल तो करते नहीं ख्याल रखते हैं?
प्रसाद-- क्यों फोन नहीं करता अभी परसों ही तो तुमसे बात हुई थी।
सिन्नी-- वह तो देव के मोबाइल पर आपने फोन किया था कभी मेरे मोबाइल पर फोन किया?
प्रसाद-- जब देव खुद ही बात करा देता है तो ऐसा करने कि मैं जरूरत नहीं समझता।
सिन्नी-- पर मुझे जरूरत है।
सिन्नी की यह बात सुनकर प्रसाद की हंसी पर ताले लग गए, जो कि अभी तक दोनों हंस-हंसकर ही बातें कर रहे थे।
इस पर सिन्नी कहती है, क्या हुआ कुछ गलत कह दिया क्या?
प्रसाद-- नहीं सरकार,आपकी बातों में इच्छा और आदेश है, जो मित्र धर्म के प्रतिकूल है।
सिन्नी-- आपने हमको सरकार कहा इसलिए मैं आपको अब आदेश देती हूं कि मेरी इच्छा और आदेश दोनों का पालन करें।
अब प्रसाद देव को एसएमएस और फोन तो करता था पर कभी- कभी सिन्नी को भीsms कर देता था, वो इस लिए कि सिन्नी भी प्रसाद को sms कर देती थी, पर प्रसाद अब भी सिन्नी से, देव के मोबाइल पर ही बात करता था।
समय अपनी गति से चल ही रहा था कि, देव 1 दिन सिन्नी के मोबाइल को देख कर चिढ़ गया और उससे प्रसाद के द्वारा भेजे गए sms के बारे में जानना चाहा।
परंतु इस बात का सिन्नी, देव को शायद संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकी जिसके कारण वह सवालों के घेरे में आ गई।
इस बात को सिन्नी, प्रसाद को नहीं बताती है और वह पहले की तरह ही प्रसाद से जुड़ी रही।
जिसका परिणाम यह होता है कि देव,सिन्नी का आपसी रिश्ता तू -तू मैं-मैं पर जा पहुंचता है।
इधर प्रसाद को इस बात की भनक तक भी नहीं लगती और जब वह इस बात को जानता है तब तक दरिया में पानी काफी बह चुका था।
होता यह है कि देव, सिन्नी से इस बात को लेकर झगड़ा करता है और उसी के सामने अपने मित्र, प्रसाद को भी काफी बुरा भला कहता है जिस पर सिन्नी भड़क जाती है, और प्रसाद का बचाव करते हुए कहती है कि उसकी कोई गलती नहीं है मैं ही उसे sms करती हूं तो वह भी हमें भेज देता है, और सिन्नी माफी मांगती है कि आगे से ऐसा नहीं होगा।
परंतु प्रेम में पड़े व्यक्ति को इस बात का विश्वास करना मुश्किल है कि उसका कोई प्रतिद्वंदी नहीं रहा, इसीलिए रंगे हाथ देव ने प्रसाद को भी फोन कर दिया और मित्र धर्म के विपरीत पूरी शत्रुता के लहजे में उससे पूछा कि तुम सिन्नी को smsक्यों करते हो?
इस पर प्रसाद मुस्कुराते हुए कहा--- बहु धनुही तोरी लरिकाईं, कबहु ना अस रिषि किंही गोसाई।
क्या बात है, क्यों इतने नाराज हो?
अजी कभी-कभी सिन्नी हमें smsकर देती थी तो हम भी जवाब में भेज देते थे, हमारा मनतब्य तुम्हारा प्यार हथियाना नहीं था।
अगर इस बात के लिए तुम्हें तकलीफ है तो हम क्षमा प्रार्थी हैं आगे से ऐसा नहीं होगा और यह कह कर प्रसाद भी फोन काट देता है।
(शायद उसके पास कोई और आ गया था और वह उसे इस रंगमंच पर चल रहे शाब्दिक चित्रण से आनंदित नहीं होने देना चाह रहा था।)
समय बीतता जाता है, सिन्नी और देव के बीच में क्या चल रहा है इस बात से प्रसाद का कोई सरोकार नहीं रहा,क्योंकि बड़े दिन बीत गए हैं देव व प्रसाद की आपसी बात चीत नहीं हुई, और प्रसाद भी खुद को परिस्थितियों के चलते संकुचित कर लेता है ।
जैसा कि आपको बता चुका हूं कि, सिन्नी का परिवार काफी खुले विचारों वाला था, अतः सिन्नी भी बहुत ही ओपन माइंड थी जिसके चलते उसके अपने इर्द-गिर्द के कुछ व्यक्तियों से मित्रवत व्यवहार हो ही जाता था।
परंतु देव को यह सब अच्छा नहीं लगता था और आए दिन उन दोनों के बीच कहासुनी हो ही जाती थी जिसका परिणाम यह निकला कि दोनों का संबंध विच्छेद हो ही जाता है और कभी न मिलने, कभी ना बात करने की सीमा रेखा तक पहुंच जाता है।
अब खुशहाल सिन्नी बहुत ही बुझी-बुझी सी रहने लगी थी।
उसके इर्द-गिर्द बहुत से उसे चाहने वाले थे पर उसका मन अशांत ही रहता था।
फिर 1 दिन सिन्नी, प्रसाद को sms करके सारी बातें बताती है, तब प्रसाद सिन्नी को फोन करता है और कहता है कि तुम कहो तो मैं देव से बात करूं परंतु सिन्नी मना कर देती है,कि अब कोई फायदा नहीं वह तुम्हें भी कुछ भला बुरा कह देगा, और मैं भी उससे कोई संबंध नहीं रखना चाहती दोनों में इतनी बातें होती हैं और फिर फोन कट जाता है।
इधर देव, प्रसाद की भी आपसी बातचीत बंद हो गई थी रही बात sms कि तो प्रसाद तो कभी-कभी कर भी देता था पर, देव शायद रुचि नहीं लेता था इसीलिए वह उसका कभी जवाब नहीं दिया इसीलिए प्रसाद भी अब उससे दूर दूर ही रहने लगा था।
इधर सिन्नी और देव के आपसी रिश्ते में खटास आ जाने के कारण, अब सिन्नी कभी-कभी प्रसाद को फोन कर देती थी और प्रसाद भी उससे बातें कर लेता था, पर प्रसाद बातचीत के दौरान देव का जिक्र जरूर करता था।
इधर सिन्नी, देव से ना जाने क्यों इतनी चिढी हुई थी कि उसका नाम आते ही वह आग बबूला हो जाती थी।
इसीलिए शायद उसने प्रसाद को दो टूक जवाब दे दिया कि अब अगर हमसे देव के बारे में कुछ पूछा तो मैं आपसे बात नहीं करूंगी प्रसाद उसकी इस बेरुखी का कोई जवाब नहीं देता है और शांत बना रहता है।
इस पर सिन्नी बोलती है, क्या हुआ?
प्रसाद कहता है- कुछ नहीं।
सिन्नी-- फिर इतने गुमसुम क्यों हो गए?
प्रसाद -- कोई बात नहीं है बस तुमको ही तो सुन रहा था।
सिन्नी-- हमसे दोस्ती करोगे?
प्रसाद--- दोस्ती तो है, वह करने की क्या जरूरत।
सिन्नी-- वह कैसे?
प्रसाद-- अगर दोस्ती ना होती तो तुम हमसे इतनी सारी बातें क्यों करती?
सिन्नी इस बात पर हँस देती है।
देव के जाने के बाद आज पहली बार उसको किसी ने हंँसाया था, शायद इसीलिए वह उसकी तरफ खींची सी जा रही थी।
शेष अगले अकं मे...........
















